पुरुष होने के मायने
पुरुष का पौरुषत्व
उसे दृढ़ बने रहने देना चाहता हैं
वो रोना चाहता हैं फूट कर
बहुत बार हारता हैं
पर उसका पौरुषत्व
उसे दृढ़ बनाता हैं
वो झुकना चाहता हैं
कई बार
मांगना चाहता हैं
माफियां
कई स्त्रियों से
पर उसका
पौरुषत्व आड़े आता हैं उसके
जो उसे झुकने नहीं देता
टूटने नहीं देता
पिघलने नहीं देता
रोने नहीं देता
वो अपनी बनी बनावट पर
कई बार धिक्कारना चाहता हैं
पर फिर थक हार कर
अपनी बनी बनावट से संतोष पाता हैं
और न जाने कितनी ही बार वो रोता होगा
अंधेरे में
ताकि देख न ले
कोई उसके पौरुषत्व
का ये फीका चेहरा
अगर देखेगा कोई तो
उसके पौरुषत्व का उड़ेगा मज़ाक
इसलिए
एक मर्द के आँसू महज आंसू नहीं होते है
उनके पीछे छुपी कई वर्षों की
वेदना का गहन भण्डार होता है
जिसे वो आंसुओ के सहारे
निकाल लेने की असफल कोशिश करता है
पुरुष ने अपने हृदय को हल्का कर लेने का सुख
नहीं पाया
वो क्रुरुर हैं हिंसात्मक हैं
पर वो
पुरुष हैं
जो रोना चाहता हैं।
मुझे लगता है हम स्त्रियों ने मर्दो से ये रोने का,आंसू बहाने का, सबसे बड़ा सुख छीन लिया है
जिसके रहते वो सिर्फ और सिर्फ घुटता है पर रोता नही है मुझे लगता है
रोना सबसे बेहतर इलाज है
मनुष्य की घुटन का
शायद यही वजह है
कि
मर्द क्रुरु,हिंसात्मक तो हो जाते है पर वो रोते नहीं है।
पुरुष का पौरुषत्व
उसे दृढ़ बने रहने देना चाहता हैं
वो रोना चाहता हैं फूट कर
बहुत बार हारता हैं
पर उसका पौरुषत्व
उसे दृढ़ बनाता हैं
वो झुकना चाहता हैं
कई बार
मांगना चाहता हैं
माफियां
कई स्त्रियों से
पर उसका
पौरुषत्व आड़े आता हैं उसके
जो उसे झुकने नहीं देता
टूटने नहीं देता
पिघलने नहीं देता
रोने नहीं देता
वो अपनी बनी बनावट पर
कई बार धिक्कारना चाहता हैं
पर फिर थक हार कर
अपनी बनी बनावट से संतोष पाता हैं
और न जाने कितनी ही बार वो रोता होगा
अंधेरे में
ताकि देख न ले
कोई उसके पौरुषत्व
का ये फीका चेहरा
अगर देखेगा कोई तो
उसके पौरुषत्व का उड़ेगा मज़ाक
इसलिए
एक मर्द के आँसू महज आंसू नहीं होते है
उनके पीछे छुपी कई वर्षों की
वेदना का गहन भण्डार होता है
जिसे वो आंसुओ के सहारे
निकाल लेने की असफल कोशिश करता है
पुरुष ने अपने हृदय को हल्का कर लेने का सुख
नहीं पाया
वो क्रुरुर हैं हिंसात्मक हैं
पर वो
पुरुष हैं
जो रोना चाहता हैं।
मुझे लगता है हम स्त्रियों ने मर्दो से ये रोने का,आंसू बहाने का, सबसे बड़ा सुख छीन लिया है
जिसके रहते वो सिर्फ और सिर्फ घुटता है पर रोता नही है मुझे लगता है
रोना सबसे बेहतर इलाज है
मनुष्य की घुटन का
शायद यही वजह है
कि
मर्द क्रुरु,हिंसात्मक तो हो जाते है पर वो रोते नहीं है।

क्या यही हकीकत हैॽ
ReplyDelete