मेरी देह
हमेशा से पुरुष की देह बनी रही
शायद मेरी देह होने का एहसास ही उससे था
एक समय था जब उस देह को नौचा-खचोटा गया
पर
शायद उस समय वो पुरुष लाचार था उसे नही पता था उस देह का अर्थ
किंतु
उसके बाद उस देह को पुरुष ने प्यार किया
खूब प्यार किया
उस देह से चिपट कर
जैसे वो स्त्री नही उसकी खुद की देह हों
वो उस देह को अपने अंदर समाने की जद्दोजहद में लगा फिर खुद ही उसका सुख पा कर
उस को चूम कर
सीने से लग जाता है
पर हाँ प्यार करता है
वो मुझ से मेरी देह से ज्यादा
पुरुष प्रेम का इजहार करता है
पर क्या करें जो स्त्री की
देह बीच में आ जाती है
उसे बदनाम और दरिंदा बताती है
वो प्यार करता है स्त्री से
पर हाँ
पुरुष की देह को चूमने पर वो कभी इल्जाम नही लगाता है
वो उसमें ही प्यार का सुख पाता है
पर स्त्री
खुद नही जानती उसकी देह ही पुरुष के लिए कब उसकी दुश्मन बन जाती है
वो नही जानती
प्रेम में स्त्री की देह बीच में आती है।
हमेशा से पुरुष की देह बनी रही
शायद मेरी देह होने का एहसास ही उससे था
एक समय था जब उस देह को नौचा-खचोटा गया
पर
शायद उस समय वो पुरुष लाचार था उसे नही पता था उस देह का अर्थ
किंतु
उसके बाद उस देह को पुरुष ने प्यार किया
खूब प्यार किया
उस देह से चिपट कर
जैसे वो स्त्री नही उसकी खुद की देह हों
वो उस देह को अपने अंदर समाने की जद्दोजहद में लगा फिर खुद ही उसका सुख पा कर
उस को चूम कर
सीने से लग जाता है
पर हाँ प्यार करता है
वो मुझ से मेरी देह से ज्यादा
पुरुष प्रेम का इजहार करता है
पर क्या करें जो स्त्री की
देह बीच में आ जाती है
उसे बदनाम और दरिंदा बताती है
वो प्यार करता है स्त्री से
पर हाँ
पुरुष की देह को चूमने पर वो कभी इल्जाम नही लगाता है
वो उसमें ही प्यार का सुख पाता है
पर स्त्री
खुद नही जानती उसकी देह ही पुरुष के लिए कब उसकी दुश्मन बन जाती है
वो नही जानती
प्रेम में स्त्री की देह बीच में आती है।

Kaafi deep
ReplyDeleteशुक्रिया दोस्त
Deleteबहुत ख़ूब ....रीतिकाल से आधुनिक युग की
ReplyDeleteसैर अच्छी लगी।
Nice
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